1947 के बाद
1947 के बाद से भारत और पाकिस्तान के बीच जितने भी पूर्ण युद्ध (1965, 1971, 1999) हुए, उनमें पाकिस्तान कभी नहीं जीता।
इसके बावजूद PoK (पाक अधिकृत कश्मीर)पाकिस्तान के पास कैसे गया, और अक्साई चिन (लद्दाख का हिस्सा) चीन के नियंत्रण में कैसे आया—इन दोनों के पीछे अलग-अलग ऐतिहासिक और राजनीतिक कारण हैं:
PoK पाकिस्तान के पास कैसे गया? (1947–1948)
अगस्त 1947 में जब भारत और पाकिस्तान आजाद हुए, तो कश्मीर के महाराजा हरि सिंह ने न तो भारत में विलय का फैसला लिया और न ही पाकिस्तान में।
पाकिस्तान का घुसपैठिया हमला (अक्टूबर 1947): पाकिस्तान ने कबायली हमलावरों और अपनी सेना के जरिए कश्मीर पर हमला कर दिया और मुजफ्फराबाद, गिलगित-बाल्टिस्तान तथा पुंछ के हिस्सों पर कब्जा कर लिया।
भारत में विलय (26 अक्टूबर 1947):महाराजा हरि सिंह ने भारत से मदद मांगी और भारत के साथ 'इन्स्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेसिन' (Instrument of Accession) पर हस्ताक्षर किए।
भारतीय सेना की कार्रवाई:भारतीय सेना हवाई मार्ग से श्रीनगर पहुंची और हमलावरों को खदेड़ना शुरू कर दिया। भारतीय सेना ने बारामूला, उरी और करगिल को वापस हासिल कर लिया।
नेहरू का UN (संयुक्त राष्ट्र) जाना और सीजफायर (1948–1949):भारतीय सेना जब हमलावरों को और पीछे धकेल रही थी, तब तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू इस मुद्दे को 1 जनवरी 1948को संयुक्त राष्ट्र (UN) में ले गए।UN के हस्तक्षेप के बाद 1 जनवरी 1949को युद्धविराम (Ceasefire) लागू कर दिया गया।
जिस समय सीजफायर हुआ, उस समय जो सेना जहाँ थी, वही रेखा Line of Control (LoC) बन गई।
परिणाम: युद्धविराम की वजह से भारतीय सेना की आगे बढ़ने की कार्रवाई रुक गई। करीब 35% कश्मीर का हिस्सा पाकिस्तान के अवैध कब्जे में ही रह गया, जिसे आजPoK (Pakistan Occupied Kashmir)कहा जाता है।
चीन को लद्दाख का अक्साई चिन कैसे मिला? (1950s–1962)
चीन ने किसी युद्ध को जीतकर नहीं, बल्कि चोरी-छिपे घुसपैठ और 1962 के युद्ध के जरिए अक्साई चिन (लगभग 38,000 वर्ग किमी) पर कब्जा किया था।
मुख्य घटनाक्रम:
सड़क निर्माण (1950 के दशक में):
अक्साई चिन बहुत ही ठंडा, निर्जन और दुर्गम इलाका था, जहाँ उस समय भारत की कोई स्थायी चौकियाँ (posts) नहीं थीं।
चीन ने तिब्बत और शिनजियांग को जोड़ने के लिए अक्साई चिन के बीच से एक सैन्य सड़क (National Highway 219) का निर्माण कर लिया।
भारत को देर से पता चलना (1957–1958): भारत सरकार को इस सड़क के बारे में 1957-58 में तब पता चला जब चीन ने अपने नक्शों में इसे छापा। भारत ने इसका कड़ा विरोध किया।
1962 का भारत-चीन युद्ध:
जब भारत ने सीमा पर अपनी फॉरवर्ड पोस्ट्स बनानी शुरू कीं, तो चीन ने 20 अक्टूबर 1962 को लद्दाख और पूर्वोत्तर (NEFA / अरुणाचल प्रदेश) में एक साथ हमला कर दिया।उस समय भारत की सेना पहाड़ी युद्ध और चीन की इस स्तर की तैयारी के लिए पूरी तरह तैयार नहीं थी।
चीन ने अक्साई चिन के पूरे इलाके पर कब्जा कर लिया और 1 महीने बाद एकतरफा सीजफायर का ऐलान करके पीछे हटने की घोषणा की, लेकिन अक्साई चिन पर अपना नियंत्रण बनाए रखा।
परिणाम जो रेखा 1962 युद्ध के बाद बनी, उसे LAC (Line of Actual Control) कहा जाता है, जिसके पार अक्साई चिन आज भी चीन के नियंत्रण में है।
PoK पाकिस्तान के पास सैन्य जीत की वजह से नहीं, बल्कि 1948 में समय से पहले हुए युद्धविराम (Ceasefire) की वजह से गया।
अक्साई चिन चीन के पास 1950 के दशक में खुफिया तरीके से की गई घुसपैठ और 1962 के युद्ध के कारण गया।
Comments
Post a Comment