क्या तुम हिंदू हो?
हिंदू को हिंदू बनाना होगा हम हिंदू हैं कहने वालो तुम हिंदू हो भी या नहीं निर्णय तुम को खुद ही करना है किसी दूसरे ने नहीं।निर्णय लेते समय आप विचार कर सकते हैं।क्यों कि हिंदू धर्म केवल विचारों या मान्यताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ‘आचार प्रधान’ धर्म है। सनातन परंपरा में ‘आचारः परमोधर्मः’ (अर्थात सदाचार और आचरण ही परम धर्म है) का सिद्धांत सर्वोपरि माना गया है। अक्सर यह देखा जाता है कि केवल जन्म से हिंदू होना ही पर्याप्त मान लिया जाता है, जबकि वास्तविक जीवन में आहार (खाना), वेष-भूषा (बाना) और विचार व भाषा (वाणी) में उस धर्म की झलक लुप्त हो जाती है। शास्त्र और तर्क दोनों इस बात की पुष्टि करते हैं कि पहचान का संरक्षण आचरण के बिना संभव नहीं है। इस विषय पर शास्त्रीय और तर्कसंगत दृष्टिकोण निम्नलिखित है: आहार/खाना: शुद्धता और चेतना का संबंध हिंदू दर्शन में भोजन को केवल पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि चेतना को दिशा देने वाला तत्व माना गया है। शास्त्रीय प्रमाण: आहारशुद्धौ सत्त्वशुद्धिः सत्त्वशुद्धौ ध्रुवा स्मृतिः। (छांदोग्य उपनिषद ७.२६.२) अर्थात: आहार की शुद्धता से अंतःकरण (मन और बुद्धि) की शुद्धता...