हिंदू समाज में “मंडार” (Mandar/Mandhar/Mandaar) या “मंडाड़/मुढाड़” शब्द
सनातन धर्म और उत्तर भारतीय (विशेषकर पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश) हिंदू समाज में “मंडार” (Mandar/Mandhar/Mandaar) या “मंडाड़/मुढाड़” शब्द एक बेहद महत्वपूर्ण उपनाम, गोत्र या कुल (Clan) है।
आपके द्वारा बताए गए ‘मंडार पंडित’ (सारस्वत ब्राह्मण) के अलावा, यह नाम अन्य कई प्रमुख जातियों में बहुतायत से पाया जाता है। इसका इतिहास मुख्य रूप से गुर्जर-प्रतिहार वंश और मंडोर (जोधपुर, राजस्थान) के प्राचीन साम्राज्य से जुड़ा है।
हिंदू समाज की अन्य प्रमुख जातियों में ‘मंडार’ कुल इस प्रकार फैले हुए हैं:
1. राजपूत समाज (मंडाड़ / मुढाड़ प्रतिहार)
राजपूतों में ‘मंडार’ या ‘मंडाड़’ एक अत्यंत वीर और प्राचीन सूर्यवंशी/अग्निवंशी राजपूत कुल माना जाता है।
इतिहास और उत्पत्ति: इतिहासकारों के अनुसार, इनका उद्गम राजस्थान के मंडोर (जोधपुर) के प्रतिहार (परिहार) राजपूतों से माना जाता है। कालान्तर में ये पंजाब और हरियाणा की ओर विस्थापित हुए।
प्रमुख क्षेत्र: हरियाणा के कैथल (पुंडरी रियासत), कुरुक्षेत्र, करनाल, जींद, पानीपत और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में मंडाड़ राजपूतों के कई गाँव हैं।
ऐतिहासिक संदर्भ: इतिहास में कैथल के राजपूत राजा मोहन सिंह मंडार (मंडाड़) का नाम बहुत प्रसिद्ध है, जिन्होंने मुग़ल शासक बाबर की सेना के खिलाफ ऐतिहासिक युद्ध लड़ा था।
2. जाट समाज (मंडार / मंडेर गोत्र)
पंजाब और हरियाणा के जाट समाज में भी ‘मंडार’ (या मंडेर) एक प्रमुख और सम्मानित गोत्र (Clan) है।
यजमानी संबंध: जैसा कि आपने अपने ब्लॉग के संदर्भ में भी देखा था, कई क्षेत्रों में मंडार जाट और मंडार पंडितों का गहरा सामाजिक और धार्मिक संबंध (पुरोहित-यजमान का रिश्ता) रहा है।
प्रमुख क्षेत्र: पंजाब के माझा और मालवा क्षेत्र (जैसे अमृतसर, तरनतारन, संगरूर, पटियाला) तथा हरियाणा के जींद और रोहतक बेल्ट में मंडार/मंडेर गोत्र के जाट परिवार पाए जाते हैं।
3. गुर्जर समाज (मंडार प्रतिहार)
गुर्जर समुदाय में भी मंडार गोत्र का एक गौरवशाली इतिहास है।
इतिहास: 6वीं से 10वीं शताब्दी के दौरान जब ‘गुर्जर-प्रतिहार’ राजवंश का शासन मंडोर (राजस्थान) और कन्नौज पर था, तब उस क्षेत्र से जुड़े गुर्जर परिवारों ने भी मंडार उपनाम अपनाया।
प्रमुख क्षेत्र: वर्तमान में ये राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में पाए जाते हैं।
4. सिख समाज (मंडेर / मंडार)
चूंकि पंजाब में रहने वाले कई जाट और राजपूत परिवारों ने मध्यकाल में सिख धर्म अपनाया, इसलिए सिख समुदाय में भी मंडेर (Mander) उपनाम वाले लोग बड़ी संख्या में पाए जाते हैं।
प्रमुख क्षेत्र: पंजाब के लुधियाना, जालंधर, अमृतसर और विदेशों में (जैसे कनाडा, यूके) बसे पंजाबी सिख परिवारों में यह गोत्र काफी आम है।
भौगोलिक फैलाव का संक्षेप (कहां-कहां पाए जाते हैं):
राज्य/क्षेत्र जातियां (Communities)मुख्य पहचान व विशेषताएं
हरियाणा (कैथल, करनाल, कुरुक्षेत्र)
राजपूत, जाट, सारस्वत ब्राह्मण मोहन सिंह मंडार का ऐतिहासिक क्षेत्र, प्राचीन जठरे और कुलदेवी/नाग पूजा की परंपरा।
पंजाब (माझा और मालवा क्षेत्र)जाट, सिख, ब्राह्मण
विभाजन से पहले पाकिस्तान के क्षेत्र (जैसे सियालकोट, लाहौर के हिस्से) में भी फैले थे, अब भारतीय पंजाब में सक्रिय हैं।
राजस्थान (मंडोर, जोधपुर, शेखावाटी)राजपूत, गुर्जर प्रतिहार वंश का मूल उद्गम स्थल, जहां से यह नाम पूरे उत्तर भारत में फैला।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश (सहारनपुर, मेरठ)राजपूत, गुर्जर हरियाणा से सटे सीमावर्ती जिलों में कृषि और सैन्य पृष्ठभूमि वाले परिवार।
इस प्रकार, सनातन हिंदू समाज की संरचना में ‘मंडार’ शब्द एक सूत्र की तरह काम करता है, जो सारस्वत ब्राह्मणों (पुरोहितों) को राजपूत, जाट और गुर्जर (यजमानों और राजाओं) के इतिहास से आपस में जोड़ता था।
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