मंडार पंडितों का सनातन धर्म में हिन्दू समाज
मंडार पंडितों का सनातन धर्म में हिन्दू समाज
सनातन धर्म में हिन्दू समाज ब्राह्मण, क्षत्रिय, पंजाबी खत्री वर्ण में जठेरो की परम्परा है।
जठेरे का शाब्दिक अर्थ होता है ज्येष्ठ। अर्थात हमारे बड़े पितर देवता। खत्री वर्ण के लोगों में जठेरो को मानने की परम्परा सदियों से चली आ रही है।
हर कुल के लोग साल में एक बार अपने जठेरो पर जाते है। तथा उनका आशीर्वाद प्राप्त करते है। हर साल उस दिन मेला लगता है (उसे मेल भी कहते है)
उस कुल के अनेको परिवार इकठे होते है। हर खत्री मुडार वर्ण के परिवार को अपने ज़ठेरो का आशीर्वाद लेने ज़रूर जाना चाहिए।
जिन लोगों को ज़ठेरो के नहीं पता उन्हें अपने बुजुर्गों से या सह उपनाम वालों से जठेरो का पता करके अपनी इस सनातनी परम्परा से अवश्य जुड़ना चाहिए।
अज्ञात जठरो को मनाने के लिए
पितृ देवता के पूजन की सरल विधि :
शुद्ध सफेद कपड़े के आसान पर पितृ देवता का चित्र स्थापित करके ,शुद्ध घी का दीपक लगाकर गूगल धुप देकर, पितृ का आवाहन करें किसी पुष्प पर विराजमान होने को पुष्प आसन देकर।
जीवन की खुशियों के लिए प्रार्थना कर के गेहूं या चावल की सेनक या चावल की खीर -पूड़ी का भोग लगाना चाहिए ।(मुड़ार ब्राह्मणों में गेहूं और गुड़ की गचक चडाने की परंपरा है)
गुड चावल कुम कुम (हल्दी) का प्रयोग पूजा में होता है।
फिर अगरबत्ती , नारियल, सतबनी मिठाई, मखाने दाने,इत्र ,हर-फूल आदि श्रद्धानुसार ।
कुलदेवता की पूजा के लिए :--संक्षिप्त रूप में 'कुलदेवताभ्यो नमः' प्रभूत शब्दों को भी उच्चारण किया जाता है| यह कुलदेवता के प्रति अभिवादन है जिससे उनका आशीर्वाद प्राप्त हो पूर्व साधना में सफलता प्राप्त हो सके|
चावल की सेनक : चावल को उबाल पका लेवे फिर उसमे घी और शक्कर मिला ले ।
अठवाई : दो पूड़ी के साथ एक मीठा पुआ और उस पर सूजी का हलवा ,ब्राह्मण मुड़ारों में प्रत्येक कुल के परिवारों के सभी सदस्यों के नाम से दो दो रोटी और हलवा झोली में लेने की परंपरा है। जिसे शुभ कार्य विवाह में भी प्रयोग करते है।
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सभी को उनकी झोली में खाने के लिए दिया जाता है।जो उन्ही को खाना होता है जिसको दिया गया हो। कई बार छोटे बच्चे नही खा पाते तो उन के माता पिता ही ग्रहण कर लेते हैं सदियों से चली आ रही परंपराओं को हमे आगे बड़ाना चाहिए।
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बात करते है मुड़ार ब्राह्मणों की जिनमे से अधिकांश अपने रीति रिवाज भूल चुके है।
पठानकोट से 16 किमी की दूरी पर कोटली मुगलान में मुड़ार ब्राह्मणों के कुल देवता नाग और देवी सत्योती जी की मूर्तियों की स्थापना कर के जठेरों को जगा दी गई है।मुड़ार , परिवार के ब्रामणो के कुल देवी देवता के जठेरो का पवित्र स्थान है जो सरकारी स्कूल की बाउंड्री में मौजूद है।
ऐसे दो स्थान तो जिला पठानकोट में है दूसरी जगह सरना रेलवे स्टेशन के पास गार्ड नामक मुडार ने स्थापित करवा रखी है उनको आरे वाले भी कहते है।
कहा जाता है कि मुड़ार भी राज पुरोहित थे , महाराजा रणजीत सिंह सांसी के सरकारी पंडित ब्राह्मण होने के कारण योद्धा ब्राह्मण हैं। ऐसे प्रमाण नेट पर उपलब्ध नहीं हैं।ना तो अभी के मुड़ारों को अपने वंश की वंशावली का ही ज्ञान है।
हरिद्वार में छजू राम पंडा जी की पोथी में मुड़ारो की वंशावली का पता चलता है। जहां जहां तक महाराजा सांसी का राज फैला रहा मुडार ब्राह्मण भी वहां वहां मौजूद हैं।
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